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कैसे लगा PNB को 2434 करोड़ का चूना? किस तरह हुआ पैसों का इतना बड़ा खेल

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Posted On:Saturday, December 27, 2025

देश के बैंकिंग इतिहास में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) एक बार फिर एक बड़े वित्तीय आघात का सामना कर रहा है। पीएनबी ने हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को सूचित किया है कि उसने कोलकाता स्थित श्रेय ग्रुप (SREI Group) से जुड़ी दो कंपनियों के खातों में 2,434 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धोखाधड़ी का पता लगाया है। नीरव मोदी कांड की कड़वी यादों के बीच, इस नए खुलासे ने बैंकिंग क्षेत्र में जोखिम प्रबंधन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

धोखाधड़ी का गणित: किन खातों में हुई हेराफेरी?

पीएनबी द्वारा स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई नियामक फाइलिंग के अनुसार, यह धोखाधड़ी मुख्य रूप से दो संस्थाओं से जुड़ी है:

  1. श्रेय इक्विपमेंट फाइनेंस लिमिटेड (SEFL): इस खाते में 1,241.48 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी पाई गई है।

  2. श्रेय इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड (SIFL): इस खाते में 1,193.19 करोड़ रुपये की गड़बड़ी का पता चला है।

बैंक ने इसे आधिकारिक तौर पर 'बरोइंग फ्रॉड' (Borrowing Fraud) के रूप में वर्गीकृत किया है। इसका अर्थ है कि कंपनी ने बैंक से जिस उद्देश्य के लिए कर्ज लिया था, उसका उपयोग वहां न करके फंड को दूसरी जगहों पर 'डायवर्ट' (मोड़ना) कर दिया गया या कागजों में हेराफेरी की गई।

श्रेय ग्रुप का पतन और RBI की कार्रवाई

श्रेय ग्रुप कभी भारत की अग्रणी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) में से एक थी, जो मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन मशीनों के लिए फाइनेंस मुहैया कराती थी। हालांकि, 2020-21 के दौरान कंपनी गहरे वित्तीय संकट में फंस गई।

  • अक्टूबर 2021: आरबीआई ने गवर्नेंस संबंधी चिंताओं और भुगतान में चूक (Default) के कारण श्रेय ग्रुप के बोर्ड को भंग कर दिया और एक प्रशासक नियुक्त किया।

  • भारी कर्ज: रिपोर्टों के अनुसार, श्रेय ग्रुप पर विभिन्न बैंकों का लगभग 28,000 करोड़ रुपये बकाया था।

  • समाधान: बाद में, नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड (NARCL) ने इस संकटग्रस्त समूह के अधिग्रहण की योजना पेश की, जिसे नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने मंजूरी दी।

फंड का डायवर्जन: कैसे हुआ घोटाला?

बैंकिंग ऑडिट में यह पाया गया कि श्रेय ग्रुप की कंपनियों ने 'रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन' (अपनी ही अन्य सहयोगी कंपनियों के साथ लेनदेन) के माध्यम से बैंक के फंड को घुमाया। जब कोई कंपनी बैंक से प्राप्त ऋण को अपनी बैलेंस शीट सुधारने या निजी लाभ के लिए अन्य शेल कंपनियों में भेज देती है, तो उसे 'फंड डायवर्जन' कहा जाता है। पीएनबी की जांच में इन्हीं नियमों की अनदेखी के संकेत मिले हैं।

खाताधारकों पर क्या होगा असर?

इतने बड़े घोटाले की खबर सुनकर आम निवेशकों और खाताधारकों का चिंतित होना स्वाभाविक है। हालांकि, पीएनबी ने आश्वस्त किया है कि इस धोखाधड़ी का बैंक की दैनिक कार्यप्रणाली पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

  • 100% प्रोविजनिंग: बैंक ने इस फंसे हुए कर्ज के एवज में पहले ही 100 फीसदी प्रोविजनिंग कर ली है। यानी, बैंक ने अपने मुनाफे से इस घाटे की भरपाई के लिए पूरी रकम अलग रख दी है।

  • मजबूत वित्तीय स्थिति: बैंक का प्रोविजन कवरेज रेश्यो (PCR) 97% के करीब है, जो यह सुनिश्चित करता है कि बैंक के पास किसी भी वित्तीय झटके को सहने की पर्याप्त क्षमता है।

निष्कर्ष: बैंकिंग प्रणाली के लिए सबक

2018 के नीरव मोदी मामले के बाद पीएनबी ने अपनी आंतरिक ऑडिट प्रणालियों को काफी मजबूत किया है। श्रेय ग्रुप का यह मामला पुराना है जिसे अब आधिकारिक तौर पर फ्रॉड घोषित किया गया है। यह घटना दर्शाती है कि बैंकों को बड़े कॉर्पोरेट लोन देते समय केवल वर्तमान एसेट्स ही नहीं, बल्कि कंपनियों के 'कैश फ्लो' और 'गवर्नेंस' पर भी कड़ी नजर रखने की जरूरत ह


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